बवासीर का घरेलु उपाय | Home Remedies for Piles in Hindi

बवासीर क्या होता है?

बवासीर सभ्य समाज का रोग है। जब हम मल त्याग करते हैं तो मलद्वार में पीड़ा उत्पन्न होती है  और मस्से बन जाते हैं गुदाद्वार की  किराए भूल जाती है यानी कि उनमें सूजन उत्पन्न होने लगता है इस पूरी क्रिया को बवासीर कहते हैं कभी-कभी मलद्वार में जब हम मल त्याग करते हैं तो बहुत असहनीय पीड़ा होती है जिसे बवासीर कहा जाता है।



बवासीर कैसे होता है और इसके मुख्य कारण क्या है?


बवासीर होने के आसान से कारण है जो हम अपने दिल्ली के दिनचर्या में यूज करते हैं जैसे कि खान पर पेट का साफ ना होना बयाना करना और अधिक बाजार के खानों पर निर्भर करना यह सब कारण बवासीर होने का मुख्य कारण बन जाता है जैसे कि मैदा,  छाना हुआ आटा,डबलरोटी, छिलके की दाल, डिब्बाबंद वस्तुएं का अधिक प्रयोग करना, पानी कम पीना और व्यायाम ना करना जिससे पेट की सफाई नहीं हो पाती और पेट में कब्ज बनने लगता है जिससे मल सूख जाता है और जब हम मल त्याग करते हैं तो बहुत अधिक पीड़ा होती है। 


बवासीर से कितने प्रकार के होते हैं?


बवासीर दो प्रकार के होते हैं बाहरी बवासीर और भीतरी बवासीर।

बाहरी बवासीर मलद्वार के बाहर होता है अक्सर उस में अधिक कष्ट नहीं होता या वर्षों तक रह जाती है केवल बीच-बीच में जब मन सूख जाता है तब यह अधिक पीड़ा देती है जैसे कि आप बहुत दिन से बीमार है और आप ठीक से खा पी नहीं रहे हैं आपके शरीर को उतना आहार नहीं मिल रहा है जितना आप रोजाना लेते हैं उस समय या बाहरी बवासीर की समस्या उत्पन्न हो जाती है एक-दो सप्ताह में सही हो जाती है या फिर एनिमा लेने से भी या ठीक हो जाती है।

भीतरी  बवासीर मलद्वार के भीतरी भाग में 1 इंच तक होती है उसकी स्थिति का पता पता भी नहीं चल पाता केवल मल त्याग करते समय कम या अधिक काले रंग का खून बाहर निकलता है किसी किसी रोगी को ये इतना ज्यादा होता है कि उनके अंदर रक्त की कमी हो जाती है भीतरी बवासीर अक्सर देखा जाता है कि ज्यादा कष्टकारी होता है और इसका सही स्थान पर पता लगाना भी मुश्किल हो जाता है जिसमें मलद्वार में या गुदाद्वार में बहुत सूजन हो जाती है और अधिक दर्द महसूस होता है बीती बवासीर का कोई नियमित सही होने का समय नहीं है किंतु आप इसको संतुलित जरूर बना सकते हैं अपने खान पीन को अच्छे से पालन करके। भीतरी बवासीर में कभी-कभी या देखा जाता है कि मनुष्य बहुत ज्यादा परेशान हो जाता है और वह सर्जरी यानी कि ऑपरेशन की क्रिया को भी अपना लेता है किंतु आप इस से बच सकते हैं बस आपको कुछ उपचार करने हैं कुछ घरेलू उपचार और जो आपको डॉक्टर द्वारा बताए गए दवाइयों का पालन करना भी अनिवार्य होता है।


बवासीर के घरेलू  उपाय (Piles ka Gharelu ilaj)


सबसे पहले आपको अपना पेट साफ रखना है रोजाना आपका पेट रोजाना अच्छे से साफ होना चाहिए आपके पेट में कब्ज की समस्या नहीं होनी चाहिए सुबह हल्के गर्म नींबू पानी का रस तथा दो चम्मच ग्लिसरीन डालकर 1 लीटर पानी का एनिमा दें और शाम को 50 मिलीलीटर ठंडे पानी का रोकने वाला इनिमा दें यह प्रक्रिया को आप लगातार एक सप्ताह तक अपनाएं अथवा दूसरे सप्ताह से ताजे पानी का नींबू का रस डालकर इस प्रक्रिया को करें उसके बाद 2 से 3 मिनी लीटर ठंडे पानी का 15 से 20 मिनट रुकने वाला इनिमा करें आप नीम की पत्तियों को भी डालकर उबाल लें और उस गर्म पानी का भी  एनिमा कर सकते हैं।

शौच के बाद गणेश क्रिया करें हथेली में तेल ले ले और उंगली से गुदा के अंदर चारों तरफ तेल की मालिश करें इससे प्रतिदिन करना चाहिए इससे  गुदाद्वार की मालिश होगी और उसमें शिराएं मुलायम बनी रहेगी जिससे आपको मल त्याग करते समय पीड़ा कम होगी।

10 मिनट  के लिए ले  पानी से सिकाई करें जैसे कि आप एक तब ले लें और उसमें ठंडा पानी डालने और अपने पांव को बाहर निकाल ले इसे कटि स्नान कहते हैं।

शाम को पेट में चिकनी मिट्टी का लेप लगा ले कम से कम या लेट 1 इंच मोटा होना चाहिए यानी कि 1 इंच की परत होनी चाहिए उसके बाद 5 मिनट पेट पर गर्म  सिकाई करें उसके बाद की ठंडी पट्टी रखे और हर 5 मिनट के बाद पति को ठंडे पानी में डालकर सिकाई करते रहे। या फिर या आपके पेट को संतुलित बनाए रखेगी यानी कि आपको अगर कब्ज की समस्या है या आपके मल त्याग करने में सूखती महसूस होती है तो वह प्रक्रिया उसमें लाभकारी होगी।

बवासीर में कौन सा योगासन करना चाहिए?


बवासीर में आपको योगा बयान करना अनिवार्य होता है लेकिन इसमें कुछ महत्वपूर्ण योगासन है जिसे करने से आपको आराम मिलेगा जैसे कि कपालभाति, धनुरासन और अश्वनी मुद्रा का अभ्यास।


बवासीर का घरेलु नुस्खे| Home Remedies for Piles in Hindi


यदि रोगी शुरुआती 8 से 10 दिन के लिए नींबू पानी सब्जी का रस फलों का रस का सेवन करता है तो इससे बहुत ज्यादा लाभ मिलता है मूली के पत्ते और मूली का रस बवासीर में बहुत लाभकारी होता है बवासीर रोगी को मूली के पत्ते और मूली का रस दिन में एक बार जरूर लेना चाहिए पालक का रस पी बहुत ही लाभकारी होता है इसके साथ-साथ खीरा पेठा सफेद लोकी का रस गाजर का रस बेल का शरबत मुसम्मी संतरे का रस या सब बवासीर में लाभकारी है तथा पेट को साफ करने में मदद देते हैं।

बाबासीर रोगी को कम से कम 2 से 3 हफ्ते के लिए दोपहर के खाने में पतला दलिया तथा सलाद  और  चोकर वाला आटा की रोटी लेनी चाहिए रात में दूध अवश्य लेना चाहिए और दिन में बाकी समय जब रोगी को भूख लगे तो उसे फल सब्जी का जूस पी लेना चाहिए या सब बवासीर के लिए लाभकारी होते हैं तथा रोगी को बवासीर की पीड़ा से मुक्त करने में काम आते हैं

रोजाना सलाद लो और दलिया और कभी कभी मूंग की दाल ले सकते हैं  यदि आप अदरक, नींबू सलाद में डालकर अपने आहार को लेंगे तो यह बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होगा रोगी को दूध दलिया के साथ किशमिश मुनक्का अंजीर रात में भिगोकर लेना चाहिए जिससे आपके शरीर में शांति तथा रक्त शुद्ध बना रहेगा।


 बवासीर में क्या नहीं खाना चाहिए?


1. बवासीर के रोगी को मिर्च , मसालों , खटाई, चाय से बहुत अधिक दूर रहना चाहिए

2. दिन में तीन बार ही खाना चाहिए बाकी समय अगर आपको भूख लग रहा है तो आप सब्जी का रस फल का रस अथवा फल ही खाएं।

3. बाहरी चीजें वर्जित हैं आलू, अरवी ,भिंडी या मैदे से बनी हुई किसी भी चीज को आप ना खाएं क्योंकि यह सब कब्ज उत्पन्न करती है और बवासीर की प्रक्रिया को और बढाती करती है।


 सुझाव:

 यह सारी प्रक्रिया को आप 1 महीने तक अपनाएं यदि 1 महीने के अंदर आपको कुछ राहत नहीं मिलती तो आप अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें और उनसे सलाह ले वह जो भी दवाइयां लिखें उनका पूरा पालन करें और योगासन और व्यायाम जरूर अपनाएं।


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